About Computer In Hindi Essay On Diwali

दिवाली  का त्यौहार 

Diwali ka Tyohar 

 

दीपावली हिंदुओं का प्रमुख पर्व है। यह पर्व समूचे भारत में उत्साह के साथ मनाया जाता है। वर्षा और शरद ऋतु के संधिकाल का यह मंगलमय पर्व है। यह कृर्षि से भी संबंधित है। ज्वार, बाजरा, मक्का, धान, कपास आदि इसी ऋतु की देन हैं। इन फसलों को ‘खरीफ’ की फसल कहते हैं।

इस त्योहार के पीछे भी अनेक कथांए हैं। कहा जाता है कि जब श्रीरामचंद्र रावण का वध करके अयोध्या लौटे, तब उस खुशी में उस दिन घर-घर एंव नगर-नगर में दीप जलाकर यह उत्सव मनाया गया। उसी समय से दीपावली की शुरुआत हुई। यह भी कहा जाता है कि श्रीकृष्ण ने नरकासुर का इसी दिन संहार किया था। यह भी कहा जाता है कि वामन का रूप धारण कर भगवान विष्णु ने दैत्यराज बलि की दानशीलता की परीक्षा लेकर उसके अहंकार को मिटाया था। तभी तो विष्णु भगवान की स्मृति में यह पर्व मनाया जाता है।

जैन धर्म के अनुसार, चौबीसवें तीर्थकर भगवान महावीर ने इसी दिन पृथ्वी पर अपनी अंतिम ज्योति फैलाई थी और वे मृत्यु को प्राप्त हो गए थे। आर्य समाज के प्रवर्तक स्वामी दयानंद सरस्वती की मृत्यु भी इसी अवसर पर हुई थी। इस प्रकार इन महापुरुषों की स्मृतियों को अमर बनाने के लिए भी यह त्योहार बहुत उल्लास के साथ मनाया जाता है।

यह त्योहार पांच दिनों तक चलता रहता है। त्रयोदशी के दिन ‘धनतेरस’ मनाया जाता है। उस दिन नए-नए बरतन खरीदना बहुत शुभ माना जाता है। एक कथा प्रचलित है कि समुद्र-मंथन से इसी दिन देवताओं के वैद्य ‘धनवंतरी’ निकले थे। इस कारण इस दिन ‘धनवंतरी तयंती’ भी मनाई जाती है। दूसरे दिन कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को छोटी दीपावली का उत्सव मनाया जाता है। श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के वध के कारण यह दिवस नरक चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है। अपने-अपने घरों से गंदगी दूर कर देना ही एक प्रकार से नरकासुर के वध को प्रतीक रूप में मना लिया जाता है।

तीसरे दिन अमावस्या होती है। दीपावली उत्सव का यह प्रधान दिन है। रात्रि के समय लक्ष्मी-पूजन होता है। उसके बाद लोग अपने घरों को दीप-मालाओं से सजाते हैं। बच्चे-बूढ़े फुलझड़ी और पटाखे छोड़ते हैं। सारा वातावरण धूम-धड़ाके से गुंजायमान हो जाता है। इस प्रकार अमावस्या की रात रोशनी की रात में बदल जाती है।

चौथे दिन ‘गोवद्र्धन-पूजा’ होती है। यह पूजा श्रीकृष्ण के गोवद्र्धन धारण करने की स्मृति में की जाती है। स्त्रियां गोबर से गोवद्र्धन की प्रतिमा बनाती है। रात्रि को उनकी पूजा होती है। किसान अपने-अपने बैलों को नहलाते हैं और उनकी शरीर पर मेहंदी एंव रंग लगाते हैं। इस दिन ‘अन्नकूट’ भी मनाया जाता है।

पांचवें दिन ‘भैयादूज’ का त्योहार होता है। इस दिन बहनें अपने-अपने भाइयों को तिलक लगाकर उनके लिए मंगल-कामना करती हैं। कहा जाता है कि इसी दिन यमुना ने अपने भाई यमराज के लिए कामना की थी। तभी से यह पूजा चली आ रही है। इसलिए इस पर्व को ‘यम द्वितीया’ भी कहते हैं।

दरअसल दीपावली का पर्व कई रूपों में उपयोगी है। इसी बहाने टूटे-फूटे घरों, दुकान, फैक्टरी आदि की सफाई-पुताई हो जाती है। वर्षा ऋतु में जितने कीट-पतंगे उत्पन्न हो जाते हैं, सबके सब मिट्टी के दिये पर मंडराकर नष्ट हो जाते हैं।

जहां दीपावली का त्योहार हमारे लिए इतना लाभप्रद है, वहीं इस त्योहर के कुछ दोष भी हैं। कुछ लोग आज के दिन जुआ आदि खेलकर अपना धन बरबाद करते हैं। उनका विश्वास है कि यदि जुए में जीत गए तो लक्ष्मी वर्ष भर प्रसन्न रहेंगी। इस प्रकार से भाज्य आजमाना कई बुराइयों को जन्म देता है, एक बात और, दीपावली पर अधिक आतिशबाजी से बचना चाहिए, क्योंकि इसका धुआं हमारे पर्यावरण के लिए हानिकारक है।

August 18, 2017evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo CommentHindi Essay, Hindi essays

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भूमिका- भारत पर्वों का देश है | यहाँ अनेकानेक पर्व मनाए जाते हैं | दीपों का उत्सव दीपावली उन्ही में से एक प्रमुख त्यौहार है | कार्तिक मास की अमावस्या की अँधेरी रात को दीपामालाएँ पूर्णिमा बना देती हैं | हर्ष-उल्लास से परिपूर्ण यह पर्व केवल बहार ही नहीं, बल्कि भीतर से भी सबमें आशा और उमंग का प्रकाश जगमगा देता है |

विस्तार- (क्यों मनाया जाता है) – दीपावली के साथ कई धार्मिक तथा एतिहासिक घटनाएँ जुड़ी हुई हैं | श्री राम चौहद वर्ष का वनवास पूरा कर इसी दिन अयोध्या पहुँचे थे | अयोध्या वासियों ने उनके स्वागत में दीपमालाएँ सजाई थीं | समूद्र मंथन से इसी दिन लक्ष्मी जी प्रकट हुई थीं | इसी दिन भगवन विष्णु ने उपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा करने लिए नरसिंह अवतार लिया था | जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंक भगवान महावीर का परिनिर्वाण भी इसी दिन हुआ था | सिक्खों के छठे गुरु हरगोविंद सिंह जी भी मुगलों की जेल से इसी दिन मुक्त हुए थे | ये सभी घटनाएँ  इस पर्व के महत्त्व को बढ़ा देती हैं |

(कैसे मनाया जाता है) दीपावली मनाने की तैयारी कई दिन पुर से ही प्रारंभ हो जाती है | घर की साफ़-सफ़ाई करके सजावट की जाती है | पकवान बनाए जाते है | बाजार और दुकाने सज जाती हैं | विशेस रूप से मिठाई और पटाखों की दुकानों में खूब रौनक रहती है | खिल-बताशो और मिटटी के खिलौने आदि खरीदना शुभ मन जाता है | दीपावली से दो दिन पहले ‘धन-तेरस’ पर नई बर्तन खरीदे जाते है | एक दिन पूर्व ‘नरक चतुर्दशी’ के दिन भी कुछ दीप जलाए जाते हैं | इस दिन श्री कृष्ण ने नरकासुर का वध  किया था |

दीपावली के दिन का सोभा तो निराली होती है— घर-बाजार नई दुल्हन की तरह सजे होते है | संध्या का अंधेरा घिरते ही सारे घर रोशनी से जगमगाउठते हैं | लक्ष्मी-पूजन और आरती होती है | लो पटाके, फुल्झारियाँ, जलाकर अपना हर्ष प्रकट करते हैं | आतिशबाजी की जगमग से अँधेरी रात रोशन हो जाती हैं |

दीपावली के अगले दिन ‘गोवरधन पूजा’ और ‘अन्नकूट’ होता है तथा दो दिन बाद ‘भैया दूज’ होता है | बहनों अपने भाईयों को तिलक करके मंगलकामना करती हैं | दीपावली का पर्व परस्पर प्रेम और भाईचारे की भावना बढाता है | लोग एक-दुसरे को फल –मिठाई या उपहार देते हैं |

दीपावली का यह सुंदर पर्व जुआ, शराब और पटाखें की दुर्गंध और दुर्घटनाओं से असुंदर भी बन जाता है | इन कुरीतियों को पूरी तरह समाप्त करके ही दीपावली का सच्चा आनंद प्राप्त हो सकता हैं |

उपसंहार- दीपावली हर वर्ष आशा, विश्वास और आनंद का उज्ज्वल प्रकाश लेकर आती है | अंधकार पर प्रकाश की, असत्य पर सत्य की, अन्याय पर न्याय की विजय का संदेश देती है |समृधि की कामना वाले इस पर्व पर हमें उनके अंधियारे जीवन को भी रोशन करना चाहिए, जो गरीब और आशिक्षा के कारण इस दिन मिठाई का एक टुकड़ा तक खरीद नही पाते |  


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